حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مُتَوَارِيًا بِمَكَّةَ، وَكَانَ يَرْفَعُ صَوْتَهُ، فَإِذَا سَمِعَ الْمُشْرِكُونَ سَبُّوا الْقُرْآنَ وَمَنْ جَاءَ بِهِ، فَقَالَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِنَبِيِّهِ صلى الله عليه وسلم {وَلاَ تَجْهَرْ بِصَلاَتِكَ وَلاَ تُخَافِتْ بِهَا}
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) was hiding himself in Mecca and used to recite the (Qur'an) in a loud voice. When the pagans heard him they would abuse the Qur'an and the one who brought it, so Allah said to His Prophet: 'Neither say your prayer aloud, nor say it in a low tone
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।