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सहीह बुख़ारी

नंबर 7541

नंबर 7541किताब 97, नंबर 166
وَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ أَخْبَرَنِي أَبُو سُفْيَانَ بْنُ حَرْبٍ، أَنَّ هِرَقْلَ، دَعَا تَرْجُمَانَهُ، ثُمَّ دَعَا بِكِتَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَرَأَهُ ‏"‏ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ مِنْ مُحَمَّدٍ عَبْدِ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى هِرَقْلَ، وَ‏{‏يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَى كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ ‏}‏‏"‏ الآيَةَ‏.‏
And Ibn 'Abbas narrated:Abu Sufyan bin Harb told me that Heraclius called for his translator and then asked for the letter of the Prophet (ﷺ), and the former read it (thus): "In the Name of Allah, the Most Gracious, the Merciful. (This letter is) from Muhammad bin 'Abdullah, to Heraclius. "...O people of the Scripture (Jews and Christians): Come to a word that is just between us and you that we worship none but Allah..." (V.3:)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।