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सहीह बुख़ारी

नंबर 7522

नंबर 7522किताब 97, नंबर 147
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ وَرْدَانَ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَيْفَ تَسْأَلُونَ أَهْلَ الْكِتَابِ عَنْ كُتُبِهِمْ وَعِنْدَكُمْ كِتَابُ اللَّهِ أَقْرَبُ الْكُتُبِ عَهْدًا بِاللَّهِ، تَقْرَءُونَهُ مَحْضًا لَمْ يُشَبْ
Narrated `Ikrima:Ibn `Abbas said, "How can you ask the people of the Scriptures about their Books while you have Allah's Book (the Qur'an) which is the most recent of the Books revealed by Allah, and you read it in its pure undistorted form?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।