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सहीह बुख़ारी

नंबर 7503

नंबर 7503किताब 97, नंबर 128
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ صَالِحٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ، قَالَ مُطِرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ قَالَ اللَّهُ أَصْبَحَ مِنْ عِبَادِي كَافِرٌ بِي وَمُؤْمِنٌ بِي ‏"‏‏.‏
Narrated Zaid bin Khalid:It rained (because of the Prophet's invocation for rain) and the Prophet (ﷺ) said, "Allah said, 'Some of My slaves have become disbelievers in Me, and some others, believers in Me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।