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सहीह बुख़ारी

नंबर 7496

नंबर 7496किताब 97, नंबर 121
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ، أَنَّ الأَعْرَجَ، حَدَّثَهُ أَنَّهُ، سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ نَحْنُ الآخِرُونَ السَّابِقُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏‏.‏ وَبِهَذَا الإِسْنَادِ ‏"‏ قَالَ اللَّهُ أَنْفِقْ أُنْفِقْ عَلَيْكَ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "We (Muslims) are the last (to come) but will be the foremost on the Day of Resurrection." The narrators of this Hadith said: Allah said (to man), 'Spend (in charity), for then I will compensate you (generously)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।