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सहीह बुख़ारी

नंबर 7459

नंबर 7459किताब 97, नंबर 85
حَدَّثَنَا شِهَابُ بْنُ عَبَّادٍ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ حُمَيْدٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ قَيْسٍ، عَنِ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يَزَالُ مِنْ أُمَّتِي قَوْمٌ ظَاهِرِينَ عَلَى النَّاسِ، حَتَّى يَأْتِيَهُمْ أَمْرُ اللَّهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Al-Mughira bin Shu`ba:I heard the Prophet (ﷺ) saying, "Some people from my followers will continue to be victorious over others till Allah's Order (The Hour) is established." (See Hadith No)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।