सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 7441

नंबर 7441किताब 97, नंबर 67
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنِي عَمِّي، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَرْسَلَ إِلَى الأَنْصَارِ فَجَمَعَهُمْ فِي قُبَّةٍ وَقَالَ لَهُمُ ‏ "‏ اصْبِرُوا حَتَّى تَلْقَوُا اللَّهَ وَرَسُولَهُ، فَإِنِّي عَلَى الْحَوْضِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:Allah's Messenger (ﷺ) sent for the Ansar and gathered them in a tent and said to them, "Be patient till you meet Allah and His Apostle, and I will be on the lake-Tank (Al-Kauthar)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।