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सहीह बुख़ारी

नंबर 7426

नंबर 7426किताब 97, नंबर 54
حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ عِنْدَ الْكَرْبِ ‏ "‏ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ الْعَلِيمُ الْحَلِيمُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ السَّمَوَاتِ وَرَبُّ الأَرْضِ رَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) used to say at the time of difficulty, 'La ilaha il-lallah Al-`Alimul-Halim. La-ilaha illallah Rabul- Arsh-al-Azim, La ilaha-il-lallah Rabus-Samawati Rab-ul-Ard; wa Rab-ul-Arsh Al- Karim.' (See Hadith No. 356 and 357, Vol)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।