सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 7396

नंबर 7396किताब 97, नंबर 25
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ كُرَيْبٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ أَنَّ أَحَدَكُمْ إِذَا أَرَادَ أَنْ يَأْتِيَ أَهْلَهُ فَقَالَ بِاسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا‏.‏ فَإِنَّهُ إِنْ يُقَدَّرْ بَيْنَهُمَا وَلَدٌ فِي ذَلِكَ لَمْ يَضُرُّهُ شَيْطَانٌ أَبَدًا ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If anyone of you, when intending to have a sexual relation (sleep) with his wife, says: Bismillah, Allahumma jannibna ashShaitan, wa Jannib ash-Shaitana ma razaqtana, Satan would never harm that child, should it be ordained that they will have one. (Because of that sleep)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।