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सहीह बुख़ारी

नंबर 7383

नंबर 7383किताब 97, नंबर 13
حَدَّثَنَا أَبُو مَعْمَرٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ أَعُوذُ بِعِزَّتِكَ الَّذِي لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ، الَّذِي لاَ يَمُوتُ وَالْجِنُّ وَالإِنْسُ يَمُوتُونَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) used to say, "I seek refuge (with YOU) by Your 'Izzat, None has the right to be worshipped but You Who does not die while the Jinns and the human beings die

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।