حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ مَنْ حَدَّثَكَ أَنَّ مُحَمَّدًا صلى الله عليه وسلم رَأَى رَبَّهُ فَقَدْ كَذَبَ وَهْوَ يَقُولُ {لاَ تُدْرِكُهُ الأَبْصَارُ} وَمَنْ حَدَّثَكَ أَنَّهُ يَعْلَمُ الْغَيْبَ فَقَدْ كَذَبَ، وَهْوَ يَقُولُ لاَ يَعْلَمُ الْغَيْبَ إِلاَّ اللَّهُ.
Narrated Masruq:`Aisha said, "If anyone tells you that Muhammad has seen his Lord, he is a liar, for Allah says: 'No vision can grasp Him.' (6.103) And if anyone tells you that Muhammad has seen the Unseen, he is a liar, for Allah says: "None has the knowledge of the Unseen but Allah
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।