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सहीह बुख़ारी

नंबर 7378

नंबर 7378किताब 97, नंबर 8
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ، عَنْ أَبِي مُوسَى الأَشْعَرِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا أَحَدٌ أَصْبَرُ عَلَى أَذًى سَمِعَهُ مِنَ اللَّهِ، يَدَّعُونَ لَهُ الْوَلَدَ، ثُمَّ يُعَافِيهِمْ وَيَرْزُقُهُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa Al-Ash`ari:The Prophet (ﷺ) said, "None is more patient than Allah against the harmful and annoying words He hears (from the people): They ascribe children to Him, yet He bestows upon them health and provision

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 97 · Oneness, Uniqueness of Allah (Tawheed)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।