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सहीह बुख़ारी

नंबर 7330

नंबर 7330किताब 96, नंबर 59
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ زُرَارَةَ، حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ مَالِكٍ، عَنِ الْجُعَيْدِ، سَمِعْتُ السَّائِبَ بْنَ يَزِيدَ، يَقُولُ كَانَ الصَّاعُ عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مُدًّا وَثُلُثًا بِمُدِّكُمُ الْيَوْمَ، وَقَدْ زِيدَ فِيهِ‏.‏ سَمِعَ الْقَاسِمُ بْنُ مَالِكٍ الْجُعَيْدَ
Narrated As-Sa'ib bin Yazid:The Sa' (a kind of measure) during the lifetime of the Prophet (ﷺ) used to be equal to the one Mudd (another kind of measure) and one third of a Mudd which we use today, but the Sa' of today has become large

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 96 · Holding Fast to the Qur'an and Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।