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सहीह बुख़ारी

नंबर 7312

नंबर 7312किताब 96, नंबर 43
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي حُمَيْدٌ، قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ بْنَ أَبِي سُفْيَانَ، يَخْطُبُ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ يُرِدِ اللَّهُ بِهِ خَيْرًا يُفَقِّهْهُ فِي الدِّينِ، وَإِنَّمَا أَنَا قَاسِمٌ وَيُعْطِي اللَّهُ، وَلَنْ يَزَالَ أَمْرُ هَذِهِ الأُمَّةِ مُسْتَقِيمًا حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ، أَوْ حَتَّى يَأْتِيَ أَمْرُ اللَّهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Humaid:I heard Muawiya bin Abi Sufyan delivering a sermon. He said, "I heard the Prophet (ﷺ) saying, "If Allah wants to do a favor to somebody, He bestows on him, the gift of understanding the Qur'an and Sunna. I am but a distributor, and Allah is the Giver. The state of this nation will remain good till the Hour is established, or till Allah's Order comes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 96 · Holding Fast to the Qur'an and Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।