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सहीह बुख़ारी

नंबर 7290

नंबर 7290किताब 96, नंबर 21
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، سَمِعْتُ أَبَا النَّضْرِ، يُحَدِّثُ عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم اتَّخَذَ حُجْرَةً فِي الْمَسْجِدِ مِنْ حَصِيرٍ، فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِيهَا لَيَالِيَ، حَتَّى اجْتَمَعَ إِلَيْهِ نَاسٌ، ثُمَّ فَقَدُوا صَوْتَهُ لَيْلَةً فَظَنُّوا أَنَّهُ قَدْ نَامَ، فَجَعَلَ بَعْضُهُمْ يَتَنَحْنَحُ لِيَخْرُجَ إِلَيْهِمْ فَقَالَ ‏ "‏ مَا زَالَ بِكُمُ الَّذِي رَأَيْتُ مِنْ صَنِيعِكُمْ، حَتَّى خَشِيتُ أَنْ يُكْتَبَ عَلَيْكُمْ، وَلَوْ كُتِبَ عَلَيْكُمْ مَا قُمْتُمْ بِهِ فَصَلُّوا أَيُّهَا النَّاسُ فِي بُيُوتِكُمْ، فَإِنَّ أَفْضَلَ صَلاَةِ الْمَرْءِ فِي بَيْتِهِ، إِلاَّ الصَّلاَةَ الْمَكْتُوبَةَ ‏"‏‏.‏
ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मस्जिद में चटाई घेर कर एक (कमरा) बना लिया, आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उस में अनेक रातों तक नमाज़ पढ़ते रहे, यहाँ तक कि कुछ लोग भी जमा होने लगे, एक रात उन लोगों ने आप (-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) की आवाज़ नहीं सुनी तो उन्हें लगा कि आप सो गए हैं, अतः कुछ लोग खंखारने लगे ताकि आप बाहर निकलें, तो आप ने फ़रमाया : “तुम जो कर रहे थे मैं उस से अवगत था (किंतु इस लिए नहीं निकला कि) कहीं तुम पर यह नमाज़ फर्ज़ न कर दी जाए, और यदि तुम पर इस को फर्ज़ कर दिया गया, तो तुम इस को अदा करने में असमर्थ रहोगे, अतः ऐ लोगो ! अपने अपने घरों में (तहज्जुद अथवा तरावीह की) नमाज़ पढ़ लिया करो, क्योंकि मनुष्य की सर्श्रेष्ठ नमाज़ उस के घर में होती है, सिवाय फर्ज़ नमाज़ों के।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 96 · Holding Fast to the Qur'an and Sunnah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।