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सहीह बुख़ारी

नंबर 7255

नंबर 7255किताब 95, नंबर 10
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ خَالِدٍ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَمِينٌ، وَأَمِينُ هَذِهِ الأُمَّةِ أَبُو عُبَيْدَةَ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) said, "For every nation there is an Amin (honest, trustworthy person) and the Amin of this nation is Abu 'Ubaida

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 95 · Accepting Information Given by a Truthful Person

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।