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सहीह बुख़ारी

नंबर 7204

नंबर 7204किताब 93, नंबर 64
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، أَخْبَرَنَا سَيَّارٌ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ بَايَعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم عَلَى السَّمْعِ وَالطَّاعَةِ، فَلَقَّنَنِي، فِيمَا اسْتَطَعْتُ، وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:I gave the Pledge of allegiance to the Prophet (ﷺ) that I would listen and obey, and he told me to add: 'As much as I can, and will give good advice to every Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 93 · Judgments (Ahkaam)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।