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सहीह बुख़ारी

नंबर 7168

नंबर 7168किताब 93, नंबर 32
قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَأَخْبَرَنِي مَنْ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ كُنْتُ فِيمَنْ رَجَمَهُ بِالْمُصَلَّى‏.‏ رَوَاهُ يُونُسُ وَمَعْمَرٌ وَابْنُ جُرَيْجٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ جَابِرٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي الرَّجْمِ‏.‏
(continued from above) Narrated Jabir bin Abdullah:I was one of those who stoned him at the Musalla in Al-Madina (See Hadith)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 93 · Judgments (Ahkaam)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।