حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " لاَ يَدْخُلُ الْمَدِينَةَ رُعْبُ الْمَسِيحِ، لَهَا يَوْمَئِذٍ سَبْعَةُ أَبْوَابٍ، عَلَى كُلِّ باب مَلَكَانِ ". قَالَ وَقَالَ ابْنُ إِسْحَاقَ عَنْ صَالِحِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَدِمْتُ الْبَصْرَةَ فَقَالَ لِي أَبُو بَكْرَةَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا.
Narrated Abu Bakra:[as above]
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।