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सहीह बुख़ारी

नंबर 7124

नंबर 7124किताब 92, नंबर 71
حَدَّثَنَا سَعْدُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَجِيءُ الدَّجَّالُ حَتَّى يَنْزِلَ فِي نَاحِيَةِ الْمَدِينَةِ، ثُمَّ تَرْجُفُ الْمَدِينَةُ ثَلاَثَ رَجَفَاتٍ، فَيَخْرُجُ إِلَيْهِ كُلُّ كَافِرٍ وَمُنَافِقٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) said, "Ad-Dajjal will come and encamp at a place close to Medina and then Medina will shake thrice whereupon every Kafir (disbeliever) and hypocrite will go out (of Medina) towards him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 92 · Afflictions and the End of the World

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।