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सहीह बुख़ारी

नंबर 7120

नंबर 7120किताब 92, नंबर 67
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، حَدَّثَنَا مَعْبَدٌ، سَمِعْتُ حَارِثَةَ بْنَ وَهْبٍ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ تَصَدَّقُوا، فَسَيَأْتِي عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ يَمْشِي الرَّجُلُ بِصَدَقَتِهِ، فَلاَ يَجِدُ مَنْ يَقْبَلُهَا ‏"‏‏.‏ قَالَ مُسَدَّدٌ حَارِثَةُ أَخُو عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ لأُمِّهِ‏ قَالَهُ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ
Narrated Haritha bin Wahb:I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying, "Give in charity because there will come a time on the people when a person will go out with his alms from place to place but will not find anybody to accept it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 92 · Afflictions and the End of the World

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।