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सहीह बुख़ारी

नंबर 7080

नंबर 7080किताब 92, नंबर 31
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ مُدْرِكٍ، سَمِعْتُ أَبَا زُرْعَةَ بْنَ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، عَنْ جَدِّهِ، جَرِيرٍ قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ ‏"‏ اسْتَنْصِتِ النَّاسَ ‏"‏‏.‏ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ لاَ تَرْجِعُوا بَعْدِي كُفَّارًا، يَضْرِبُ بَعْضُكُمْ رِقَابَ بَعْضٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Jarir:The Prophet (ﷺ) said to me during Hajjat-al-Wada`, "Let the people keep quiet and listen." Then he said (addressing the people), "Beware! Do not renegade as disbelievers after me by striking (cutting) the necks of one another

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 92 · Afflictions and the End of the World

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।