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सहीह बुख़ारी

नंबर 7064

नंबर 7064किताब 92, नंबर 15
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنَا شَقِيقٌ، قَالَ جَلَسَ عَبْدُ اللَّهِ وَأَبُو مُوسَى فَتَحَدَّثَا فَقَالَ أَبُو مُوسَى قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ بَيْنَ يَدَىِ السَّاعَةِ أَيَّامًا يُرْفَعُ فِيهَا الْعِلْمُ، وَيَنْزِلُ فِيهَا الْجَهْلُ، وَيَكْثُرُ فِيهَا الْهَرْجُ، وَالْهَرْجُ الْقَتْلُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Musa:The Prophet (ﷺ) said, "Near the establishment of the Hour there will be days during which (religious) knowledge will be taken away (vanish) and general ignorance will spread, and there will be Al-Harj in abundance, and Al-Harj means killing

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 92 · Afflictions and the End of the World

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।