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सहीह बुख़ारी

नंबर 597

नंबर 597किताब 9, नंबर 72
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، وَمُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالاَ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ مَنْ نَسِيَ صَلاَةً فَلْيُصَلِّ إِذَا ذَكَرَهَا، لاَ كَفَّارَةَ لَهَا إِلاَّ ذَلِكَ ‏"‏‏.‏ ‏{‏وَأَقِمِ الصَّلاَةَ لِذِكْرِي‏}‏ قَالَ مُوسَى قَالَ هَمَّامٌ سَمِعْتُهُ يَقُولُ بَعْدُ ‏{‏وَأَقِمِ الصَّلاَةَ لِذِكْرِي‏}‏‏.‏وَقَالَ حَبَّانُ حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، حَدَّثَنَا أَنَسٌ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) said, "If anyone forgets a prayer he should pray that prayer when he remembers it. There is no expiation except to pray the same." Then he recited: "Establish prayer for My (i.e. Allah's) remembrance

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।