حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ فَضَالَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى ـ هُوَ ابْنُ أَبِي كَثِيرٍ ـ عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، أَنَّ أَبَا الْمَلِيحِ، حَدَّثَهُ قَالَ كُنَّا مَعَ بُرَيْدَةَ فِي يَوْمٍ ذِي غَيْمٍ فَقَالَ بَكِّرُوا بِالصَّلاَةِ فَإِنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " مَنْ تَرَكَ صَلاَةَ الْعَصْرِ حَبِطَ عَمَلُهُ ".
Narrated Ibn Abu Malih [??]:I was with Buraida on a cloudy day and he said, "Offer the `Asr prayer earlier as the Prophet (ﷺ) said, 'Whoever leaves the `Asr prayer will have all his (good) deeds annulled." (See Hadith No. 527 and)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।