सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 556

नंबर 556किताब 9, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا أَدْرَكَ أَحَدُكُمْ سَجْدَةً مِنْ صَلاَةِ الْعَصْرِ قَبْلَ أَنْ تَغْرُبَ الشَّمْسُ فَلْيُتِمَّ صَلاَتَهُ، وَإِذَا أَدْرَكَ سَجْدَةً مِنْ صَلاَةِ الصُّبْحِ قَبْلَ أَنْ تَطْلُعَ الشَّمْسُ فَلْيُتِمَّ صَلاَتَهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "If anyone of you can get one rak`a of the `Asr prayer before sunset, he should complete his prayer. If any of you can get one rak`a of the Fajr prayer before sunrise, he should complete his prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।