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सहीह बुख़ारी

नंबर 542

नंबर 542किताब 9, नंबर 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ ـ يَعْنِي ابْنَ مُقَاتِلٍ ـ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، قَالَ أَخْبَرَنَا خَالِدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنِي غَالِبٌ الْقَطَّانُ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْمُزَنِيِّ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كُنَّا إِذَا صَلَّيْنَا خَلْفَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالظَّهَائِرِ فَسَجَدْنَا عَلَى ثِيَابِنَا اتِّقَاءَ الْحَرِّ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:When we offered the Zuhr prayers behind Allah's Messenger (ﷺ) we used to prostrate on our clothes to protect ourselves from the heat

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।