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सहीह बुख़ारी

नंबर 524

नंबर 524किताब 9, नंबर 3
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنَا قَيْسٌ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ بَايَعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى إِقَامِ الصَّلاَةِ، وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ، وَالنُّصْحِ لِكُلِّ مُسْلِمٍ‏.‏
Narrated Jarir bin `Abdullah:I gave the pledge of allegiance to Allah's Messenger (ﷺ) for to offer prayers perfectly, to pay Zakat regularly, and to give good advice to every Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 9 · Times of the Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।