حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانُ، حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ، أَنَّ أَبَاهُ، حَدَّثَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ـ وَذَكَرَ الْحَرُورِيَّةَ ـ فَقَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " يَمْرُقُونَ مِنَ الإِسْلاَمِ مُرُوقَ السَّهْمِ مِنَ الرَّمِيَّةِ ".
Narrated `Abdullah bin `Umar:Regarding Al-Harauriyya: The Prophet (ﷺ) said, "They will go out of Islam as an arrow darts out of the game's body
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।