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सहीह बुख़ारी

नंबर 6871

नंबर 6871किताब 87, नंबर 10
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ، سَمِعَ أَنَسًا ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ الْكَبَائِرُ ‏"‏‏.‏ وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنِ ابْنِ أَبِي بَكْرٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ أَكْبَرُ الْكَبَائِرِ الإِشْرَاكُ بِاللَّهِ وَقَتْلُ النَّفْسِ، وَعُقُوقُ الْوَالِدَيْنِ، وَقَوْلُ الزُّورِ ‏"‏‏.‏ أَوْ قَالَ ‏"‏ وَشَهَادَةُ الزُّورِ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) said, "The biggest of Al-Ka`ba'ir (the great sins) are (1) to join others as partners in worship with Allah, (2) to murder a human being, (3) to be undutiful to one's parents (4) and to make a false statement," or said, "to give a false witness

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 87 · Blood Money (Ad-Diyat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।