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सहीह बुख़ारी

नंबर 6840

नंबर 6840किताब 86, नंबर 63
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا الشَّيْبَانِيُّ، سَأَلْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى عَنِ الرَّجْمِ، فَقَالَ رَجَمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم‏.‏ فَقُلْتُ أَقَبْلَ النُّورِ أَمْ بَعْدَهُ قَالَ لاَ أَدْرِي‏.‏ تَابَعَهُ عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ وَخَالِدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ وَالْمُحَارِبِيُّ وَعَبِيدَةُ بْنُ حُمَيْدٍ عَنِ الشَّيْبَانِيِّ‏.‏ وَقَالَ بَعْضُهُمُ الْمَائِدَةُ‏.‏ وَالأَوَّلُ أَصَحُّ‏.‏
Narrated Ash-Shaibani:I asked `Abdullah bin Abi `Aufa about the Rajam (stoning somebody to death for committing illegal sexual intercourse). He replied, "The Prophet (ﷺ) carried out the penalty of Rajam," I asked, "Was that before or after the revelation of Surat-an-Nur?" He replied, "I do not know

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 86 · Limits and Punishments set by Allah (Hudood)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।