حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْجُعْفِيُّ، حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ يَعْلَى بْنَ حَكِيمٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ لَمَّا أَتَى مَاعِزُ بْنُ مَالِكٍ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهُ " لَعَلَّكَ قَبَّلْتَ أَوْ غَمَزْتَ أَوْ نَظَرْتَ ". قَالَ لاَ يَا رَسُولَ اللَّهِ. قَالَ " أَنِكْتَهَا ". لاَ يَكْنِي. قَالَ فَعِنْدَ ذَلِكَ أَمَرَ بِرَجْمِهِ.
अब्दुल्लाग बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह कहते हैं कि जब माइज़ बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए (तथा अपने व्यभिचार व दुष्कर्म का इक़रार किया) तो आपने उनसे कहा : “हो सकता है तुमने चुंबन लिया हो अथवा उसको छुआ हो अथवा उसकी ओर देखा हो।” उन्होंने कहा : नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल (ऐसी बात नहीं है)। तो आपने उनसे बिना किसी लाग-लपेट के पूछा : “क्या तुमने उसके संग संभोग किया है?” (जब उन्होंने इसका इक़रार कर लिया तो) आपने उनको संगसार करने का आदेश दिया।
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।