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सहीह बुख़ारी

नंबर 6812

नंबर 6812किताब 86, नंबर 41
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ كُهَيْلٍ، قَالَ سَمِعْتُ الشَّعْبِيَّ، يُحَدِّثُ عَنْ عَلِيٍّ، رضى الله عنه حِينَ رَجَمَ الْمَرْأَةَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ وَقَالَ قَدْ رَجَمْتُهَا بِسُنَّةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Ash-Shu`bi:from `Ali when the latter stoned a lady to death on a Friday. `Ali said, "I have stoned her according to the tradition of Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 86 · Limits and Punishments set by Allah (Hudood)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।