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सहीह बुख़ारी

नंबर 6764

नंबर 6764किताब 85, नंबर 41
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ حُسَيْنٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ عُثْمَانَ، عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَرِثُ الْمُسْلِمُ الْكَافِرَ، وَلاَ الْكَافِرُ الْمُسْلِمَ ‏"‏‏.‏
Narrated Usama bin Zaid:the Prophet (ﷺ) said, "A Muslim cannot be the heir of a disbeliever, nor can a disbeliever be the heir of a Muslim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 85 · Laws of Inheritance (Al-Faraa'id)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।