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सहीह बुख़ारी

नंबर 6681

नंबर 6681किताब 83, नंबर 58
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ لَمَّا حَضَرَتْ أَبَا طَالِبٍ الْوَفَاةُ جَاءَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ قُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ كَلِمَةً‏.‏ أُحَاجُّ لَكَ بِهَا عِنْدَ اللَّهِ ‏"‏‏.‏
Narrated Al-Musaiyab:When the death of Abu Talib approached, Allah's Messenger (ﷺ) came to him and said, "Say: La ilaha illallah, a word with which I will be able to defend you before Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।