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सहीह बुख़ारी

नंबर 6664

नंबर 6664किताब 83, नंबर 42
حَدَّثَنَا خَلاَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، حَدَّثَنَا زُرَارَةُ بْنُ أَوْفَى، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، يَرْفَعُهُ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ تَجَاوَزَ لأُمَّتِي عَمَّا وَسْوَسَتْ أَوْ حَدَّثَتْ بِهِ أَنْفُسَهَا، مَا لَمْ تَعْمَلْ بِهِ أَوْ تَكَلَّمْ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "Allah forgives my followers those (evil deeds) their souls may whisper or suggest to them as long as they do not act (on it) or speak

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।