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सहीह बुख़ारी

नंबर 6631

नंबर 6631किताब 83, नंबर 11
حَدَّثَنِي مُحَمَّدٌ، أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ يَا أُمَّةَ مُحَمَّدٍ وَاللَّهِ لَوْ تَعْلَمُونَ مَا أَعْلَمُ لَبَكَيْتُمْ كَثِيرًا، وَلَضَحِكْتُمْ قَلِيلاً ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) said, "O followers of Muhammad! By Allah, if you knew what I know, you would weep much and laugh little

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।