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सहीह बुख़ारी

नंबर 6625

नंबर 6625किताब 83, नंबर 5
فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ وَاللَّهِ لأَنْ يَلِجَّ أَحَدُكُمْ بِيَمِينِهِ فِي أَهْلِهِ آثَمُ لَهُ عِنْدَ اللَّهِ مِنْ أَنْ يُعْطِيَ كَفَّارَتَهُ الَّتِي افْتَرَضَ اللَّهُ عَلَيْهِ ‏"‏‏.‏
Allah's Messenger (ﷺ) also said:"By Allah, if anyone of you insists on fulfilling an oath by which he may harm his family, he commits a greater sin in Allah's sight than that of dissolving his oath and making expiation for it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 83 · Oaths and Vows

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।