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सहीह बुख़ारी

नंबर 6582

नंबर 6582किताब 81, नंबर 170
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَيَرِدَنَّ عَلَىَّ نَاسٌ مِنْ أَصْحَابِي الْحَوْضَ، حَتَّى عَرَفْتُهُمُ اخْتُلِجُوا دُونِي، فَأَقُولُ أَصْحَابِي‏.‏ فَيَقُولُ لاَ تَدْرِي مَا أَحْدَثُوا بَعْدَكَ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) said, "Some of my companions will come to me at my Lake Fount, and after I recognize them, they will then be taken away from me, whereupon I will say, 'My companions!' Then it will be said, 'You do not know what they innovated (new things) in the religion after you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।