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सहीह बुख़ारी

नंबर 6566

नंबर 6566किताब 81, नंबर 155
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ ذَكْوَانَ، حَدَّثَنَا أَبُو رَجَاءٍ، حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ حُصَيْن ٍ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَخْرُجُ قَوْمٌ مِنَ النَّارِ بِشَفَاعَةِ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم فَيَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ، يُسَمَّوْنَ الْجَهَنَّمِيِّينَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Imran bin Husain:The Prophet (ﷺ) said, "Some people will be taken out of the Fire through the intercession of Muhammad they will enter Paradise and will be called Al-Jahannamiyin (the Hell Fire people)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।