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सहीह बुख़ारी

नंबर 6553

नंबर 6553किताब 81, नंबर 142
قَالَ أَبُو حَازِمٍ فَحَدَّثْتُ بِهِ النُّعْمَانَ بْنَ أَبِي عَيَّاشٍ، فَقَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَعِيدٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ فِي الْجَنَّةِ لَشَجَرَةً يَسِيرُ الرَّاكِبُ الْجَوَادَ الْمُضَمَّرَ السَّرِيعَ مِائَةَ عَامٍ، مَا يَقْطَعُهَا ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Sa'id: The Prophet (ﷺ) said: There is a tree in Paradise (so huge) that a fast (or a trained) rider may travel: for one hundred years without being able to cross it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।