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सहीह बुख़ारी

नंबर 6461

नंबर 6461किताब 81, नंबर 50
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، أَخْبَرَنَا أَبِي، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ أَشْعَثَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ مَسْرُوقًا، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَىُّ الْعَمَلِ كَانَ أَحَبَّ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتِ الدَّائِمُ‏.‏ قَالَ قُلْتُ فَأَىَّ حِينٍ كَانَ يَقُومُ قَالَتْ كَانَ يَقُومُ إِذَا سَمِعَ الصَّارِخَ‏.‏
Narrated Masruq:I asked `Aisha "What deed was the most beloved to the Prophet?" She said, "The regular constant one." I said, "At what time did he use to get up at night (for the Tahajjud night prayer)?' She said, "He used to get up on hearing (the crowing of) the cock (the last third of the night)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।