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सहीह बुख़ारी

नंबर 6458

नंबर 6458किताब 81, नंबर 47
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، أَخْبَرَنِي أَبِي، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كَانَ يَأْتِي عَلَيْنَا الشَّهْرُ مَا نُوقِدُ فِيهِ نَارًا، إِنَّمَا هُوَ التَّمْرُ وَالْمَاءُ، إِلاَّ أَنْ نُؤْتَى بِاللُّحَيْمِ‏.‏
Narrated `Aisha:A complete month would pass by during which we would not make a fire (for cooking), and our food used to be only dates and water unless we were given a present of some meat

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।