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सहीह बुख़ारी

नंबर 6451

नंबर 6451किताब 81, नंबर 40
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ لَقَدْ تُوُفِّيَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَمَا فِي رَفِّي مِنْ شَىْءٍ يَأْكُلُهُ ذُو كَبِدٍ، إِلاَّ شَطْرُ شَعِيرٍ فِي رَفٍّ لِي، فَأَكَلْتُ مِنْهُ حَتَّى طَالَ عَلَىَّ، فَكِلْتُهُ، فَفَنِيَ‏.‏
Narrated `Aisha:When the Prophet (ﷺ) died, nothing which can be eaten by a living creature was left on my shelf except some barley grain. I ate of it for a period and when I measured it, it finished

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।