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सहीह बुख़ारी

नंबर 6436

नंबर 6436किताब 81, नंबर 25
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لَوْ كَانَ لاِبْنِ آدَمَ وَادِيَانِ مِنْ مَالٍ لاَبْتَغَى ثَالِثًا، وَلاَ يَمْلأُ جَوْفَ ابْنِ آدَمَ إِلاَّ التُّرَابُ، وَيَتُوبُ اللَّهُ عَلَى مَنْ تَابَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:I heard the Prophet (ﷺ) saying, "If the son of Adam (the human being) had two valleys of money, he would wish for a third, for nothing can fill the belly of Adam's son except dust, and Allah forgives him who repents to Him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।