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सहीह बुख़ारी

नंबर 6431

नंबर 6431किताब 81, नंबर 20
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنِي قَيْسٌ، قَالَ أَتَيْتُ خَبَّابًا وَهْوَ يَبْنِي حَائِطًا لَهُ فَقَالَ إِنَّ أَصْحَابَنَا الَّذِينَ مَضَوْا لَمْ تَنْقُصْهُمُ الدُّنْيَا شَيْئًا، وَإِنَّا أَصَبْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ شَيْئًا، لاَ نَجِدُ لَهُ مَوْضِعًا إِلاَّ التُّرَابَ‏.‏
Narrated Qais:I came to Khabbab while he was building a wall, and he (Khabbab) said, "Our companions who have left this world, did not enjoy anything of their reward therein, while we have collected after them, much wealth that we cannot spend but on earth (i.e., on building)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।