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सहीह बुख़ारी

नंबर 6423

नंबर 6423किताब 81, नंबर 12
قَالَ سَمِعْتُ عِتْبَانَ بْنَ مَالِكٍ الأَنْصَارِيَّ، ثُمَّ أَحَدَ بَنِي سَالِمٍ قَالَ غَدَا عَلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ لَنْ يُوَافِيَ عَبْدٌ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَقُولُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏.‏ يَبْتَغِي بِهِ وَجْهَ اللَّهِ، إِلاَّ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ النَّارَ ‏"‏‏.‏
Narrated `Utban bin Malik Al-Ansari:who was one of the men of the tribe of Bani Salim: Allah's Messenger (ﷺ) came to me and said, "If anybody comes on the Day of Resurrection who has said: La ilaha illal-lah, sincerely, with the intention to win Allah's Pleasure, Allah will make the Hell-Fire forbidden for him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।