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सहीह बुख़ारी

नंबर 6419

नंबर 6419किताब 81, नंबर 8
حَدَّثَنِي عَبْدُ السَّلاَمِ بْنُ مُطَهَّرٍ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ مَعْنِ بْنِ مُحَمَّدٍ الْغِفَارِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ أَعْذَرَ اللَّهُ إِلَى امْرِئٍ أَخَّرَ أَجَلَهُ حَتَّى بَلَّغَهُ سِتِّينَ سَنَةً ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ أَبُو حَازِمٍ وَابْنُ عَجْلاَنَ عَنِ الْمَقْبُرِيِّ‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "Allah will not accept the excuse of any person whose instant of death is delayed till he is sixty years of age

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 81 · To make the Heart Tender (Ar-Riqaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।