حَدَّثَنَا ابْنُ سَلاَمٍ، أَخْبَرَنَا وَكِيعٌ، عَنِ ابْنِ أَبِي خَالِدٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الأَحْزَابِ فَقَالَ " اللَّهُمَّ مُنْزِلَ الْكِتَابِ، سَرِيعَ الْحِسَابِ، اهْزِمِ الأَحْزَابَ، اهْزِمْهُمْ وَزَلْزِلْهُمْ ".
Narrated Ibn Abi `Aufa:Allah's Messenger (ﷺ) asked for Allah's wrath upon the Ahzab (confederates), saying, "O Allah, the Revealer of the Holy Book, and the One swift at reckoning! Defeat the confederates; Defeat them and shake them
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।