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सहीह बुख़ारी

नंबर 6389

नंबर 6389किताब 80, नंबर 84
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ أَكْثَرُ دُعَاءِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اللَّهُمَّ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً، وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً، وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ ‏"‏‏.‏
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सर्वाधिक जो दुआ करते थे वह यह है : “हे अल्लाह, हमारे रब, हमें दुनिया में भी अच्छी दशा प्रदान कर और आख़िरत में भी अच्छी दशा प्रदान कर और हमें जहन्नम की यातना से बचा ले।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।